Main Kya karu k yehi Jayka juban ka hai

मैं खुद ज़मीन हूँ मगर ज़र्फ़ आसमान का है के टूट कर भी मेरा हौसला चट्टान का है बुरा न मान मेरे हर्फ ज़हर-ज़हर से हैं मैं क्या करूँ के येही जायका जुबान का है

Yu he kabhi aatay jatay kabhi tum bh jara pucho na

तुम मुझ से रूठे हो चलो माना बस यूँ ही, एक बार, हो सके तो मुड़के देखो ना थी जो कभी अपने साजन की अलबेली कैसे भरी दुनिया में खड़ी है वो अकेली यूँ ही आते जाते कभी तुम भी…

Ek Pagli

एक पगली मेरा नाम जो ले शरमाये भी घबराये भी गलियों गलियों मुझसे मिलने आये भी घबराये भी रात गए घर जाने वाली गुमसुम लड़की राहों में अपनी उलझी जुल्फों को सुलझाए भी घबराये भी कौन बिछड़ कर फिर लौटेगा…

यार तुम कमाल करते हो

मुघ्को पागल कहते हो, हज़ारों सवाल करते हो – छोटी सी बात पर, इतना बवाल करते हो ग्रीन टेक की बातें करके, हाल बेहाल करते हो – यूँ रूठे रूठे रहते हो ,यार तुम कमाल करते हो ————————————————————————————– हमको याद…

जब से उस ने शहर को छोड़ा हर रास्ता सुनसान हुआ अपना क्या है सारे शहर का इक जैसा नुकसान हुआ

जब से उस ने शहर को छोड़ा हर रास्ता सुनसान हुआ अपना क्या है सारे शहर का इक जैसा नुकसान हुआ मेरे हाल पे हैरत कैसी दर्द के तनहा मौसम में पत्थर भी रो पड़ते हैं इन्सान तो फिर इन्सान…

Pappu: Maa muze AIDS ho gaya hai.

Pappu U.S.A. se apni maa ko phone krta h.   Pappu: Maa muze AIDS ho gaya hai. Maa:Tu wapas mat aana BETA Pappu: Q maa Maa : Agar tu aaya to Teri BIWI ko AIDS hoga, Teri BIWI se tere…