A Daily Post Blog

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चलो ये अश्क ही मोती समझ के बेच आये किसी तरह तो हमें रोज़गार करना है

वफ़ा में अब यह हुनर इख्तियार करना है वोह सच कहे न कहे ऐतबार करना है यह तुझ को जागते रहने का शौक कब से हुआ? मुझे तो खैर तेरा इंतजार करना है हवा...

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Main Kya karu k yehi Jayka juban ka hai

मैं खुद ज़मीन हूँ मगर ज़र्फ़ आसमान का है के टूट कर भी मेरा हौसला चट्टान का है बुरा न मान मेरे हर्फ ज़हर-ज़हर से हैं मैं क्या करूँ के येही जायका जुबान का...

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Yu he kabhi aatay jatay kabhi tum bh jara pucho na

तुम मुझ से रूठे हो चलो माना बस यूँ ही, एक बार, हो सके तो मुड़के देखो ना थी जो कभी अपने साजन की अलबेली कैसे भरी दुनिया में खड़ी है वो अकेली यूँ...

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Ek Pagli

एक पगली मेरा नाम जो ले शरमाये भी घबराये भी गलियों गलियों मुझसे मिलने आये भी घबराये भी रात गए घर जाने वाली गुमसुम लड़की राहों में अपनी उलझी जुल्फों को सुलझाए भी घबराये...

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यार तुम कमाल करते हो

मुघ्को पागल कहते हो, हज़ारों सवाल करते हो – छोटी सी बात पर, इतना बवाल करते हो ग्रीन टेक की बातें करके, हाल बेहाल करते हो – यूँ रूठे रूठे रहते हो ,यार तुम...

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जब से उस ने शहर को छोड़ा हर रास्ता सुनसान हुआ अपना क्या है सारे शहर का इक जैसा नुकसान हुआ

जब से उस ने शहर को छोड़ा हर रास्ता सुनसान हुआ अपना क्या है सारे शहर का इक जैसा नुकसान हुआ मेरे हाल पे हैरत कैसी दर्द के तनहा मौसम में पत्थर भी रो...