Main Kya karu k yehi Jayka juban ka hai

मैं खुद ज़मीन हूँ मगर ज़र्फ़ आसमान का है
के टूट कर भी मेरा हौसला चट्टान का है
बुरा न मान मेरे हर्फ ज़हर-ज़हर से हैं
मैं क्या करूँ के येही जायका जुबान का है

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