A Discussion Between Body And Soul

:-सुबह के 4 बजे:-

“आत्मा” — चलो उठो साधना का समय हो गया है !
उठो ना !
उठो ना !
उठो ना !

“शरीर” — सोने दो न ! क्यों तंग कर रही हो ?
😧😧😧
पता नहीं क्या रात को बहुत देर से सोया था………
😴😴😴
थोड़ी देर के बाद साधना करूँगा ।

“आत्मा” — बोली ठीक है और मन में सोचने लगी मुझे भूख लगी है और ये है क़ि समझता ही नहीं है

सुबह के 6:- बजे तो आत्मा बोली – अब तो उठ जाओ भाई !सूरज भी आपनी किरणे फैलाते हुए हमें उठा रहा है उठो नplzzzzz.
उठो ना !
उठो ना !
उठो ना plzzzz !
🌞🌞🌞🌞🌞

“शरीर” — कितना परेशान करती हो ! ठीक है उठ रहा हूँ बस 5 मिनट और सोने दो !

आत्मा छटपटाती हुई शरीर के इंतजार में कि ये कब उठेगा और कब मेरी भूख को शांत करेगा
😧😧😧

!!!!!थोड़ी देर बाद साधना में बैठने के लिए शरीर ने वक्त निकाला ।

20-25 मिनट साधना में बैठा और आत्मा कुछ तृप्त ही हुई थी की शरीर उठ गया…….
😧

“आत्मा” — अरे रे रे रे क्या हुआ क्यों उठ गए अभी तो मैं तृप्त हुई भी नहीं हूँ कि तुम उठ रहे हो !!!!!
😔😔😔
क्या हुआ भाई ? कहाँ जा रहे हो ?
😒😒😒

“शरीर” — अरे मुझे (ऑफिस or घर का ) काम पर जाना है तुम्हारी तो कुछ समझ में ही नहीं आता !!!!
😠😠😠

“आत्मा” — ठीक है शाम को तो साधना करोगे न ?
😧😧😧

“शरीर” — (परेशान होते हुए) हाँ भई हाँ ।

सारा दिन निकल गया, आत्मा भूख से तड़पते हुए ……
😧😧😟😟
शाम हो गई आत्मा खुश हुई चलो अब तो मेरी भूख का निवारण हो ही जायेगा …
😃😃😃😃

शरीर ऑफिस और घर के काम से कुछ फ्री हुआ ही था की आत्मा आवाज देती है ।
😁😁😁

“आत्मा” — अरे फ्री हो गए !
अब तो चल ही सकते हो साधना के लिए चलो न ।
😳😳😳

“शरीर” — क्यों सारा दिन तंग करती रहती हो ?
😠😡😡😠
देखती नहीं हो मैं अभी ऑफिस और घर के कामों से फ्री हुआ हूँ, थक गया हूँ ।
😴😴😴

“आत्मा” — अरे तुम थके हुए हो तो साधना में जैसे ही बैठोगे तो तुम्हारी थकान चुटकी में दूर हो जाएगी …
👌👌👌✋

“शरीर” — नहीं अभी नहीं रात को पक्का बैठूँगा ।
🌚🌚🌚

शरीर की स्थिति – आँखें नींद में भरी हुई, थकान से बुरा हाल जैसे-तैसे आत्मा की ख़ुशी के लिए साधना में बैठे ….
😁😧😟😁

आत्मा की कुछ भूख शांत हुई ही थी कि यहाँ शरीर की आँखे नींद से भर गई ..
😴😴😴😴

शरीर उठा और सोने के लिए जाने ही लगा था क़ि ..
😳😳😳

“आत्मा बोल उठी” — अरे अरे क्या हुआ क्यों उठ गए अभी बैठे ही थे की उठ भी गए ।
😧😧😧

“शरीर” — मैं थक गया हूँ यार !!
😔😔😔
कल सुबह को पक्का 4 बजे उठ के साधना करुगा …..
😃😃😃

“आत्मा” — तुम फिर से बहाना बना रहे हो तुम नहीं उठोगे मुझे पता है ।
😫😩😫

आत्मा दुखी होकर चुप हो गई तभी शरीर ने मोबाइल पर msg देखा।
😳😳😳

“शरीर” — अरे ये तो मेरे best frd का msg
है चलो थोड़ी देर चैटिंग करके सोता हूँ …
😊😊😃

आत्मा सोचती है (मन ही मन)- देखो साधना के वक्त तो इसे नींद आ रही थी और अब देखो friends से बात करने के वक्त नींद ही गायब हो गई ।
😳😒😳
जिसकी वजह से इसका अस्तित्व है उसी की ही परवाह नहीं है इसे
😔😔😔
“आत्मा” — खैर चलो कल देखते है।

परंतु फिर वही दिनचर्या…..
सुबह के 4 बजे से रात के वक्त तक और आत्मा भूखी की भूखी रह जाती है ।

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