आज भी सूना पड़ा है हर एक मंज़र

आज भी सूना पड़ा है हर एक मंज़र; तेरे जाने से सब कुछ वीरान लगता है; उस रास्ते पे आज भी हम तेरी राह देखते हैं; जहाँ से तेरा लौट आना आसान लगता है।

दोस्त बनकर भी नहीं…

दोस्त बनकर भी नहीं साथ निभाने वाला; वो ही अंदाज़ है ज़ालिम का ज़माने वाला; क्या कहें कितने मरासिम थे हमारे उससे; वो जो इक शख़्स है मुँह फेर के जाने वाला; क्या ख़बर थी जो मेरी जाँ में घुला…

Adarsh Indian Biwi

ADARSH INDIAN BIWI . Wife: khane main kya banau? Huband: kuch bhi bana lo..kya banaogi? Wife: jo aap kaho Husband: dal chawal bana lo Wife: subah hi toh khaye the Husband: toh roti sabzi bana lo Wife: bachche nahi khayenge…